अपराधियों का काल बनी यूपी एसटीएफ मेरठ में फिर गरजा एसटीएफ का हंटर
लखनऊ/मेरठ। उत्तर प्रदेश की धरती पर कानून से खिलवाड़ करने वाले गैंग्स, अपराधियों और अवैध शस्त्र तस्करों के लिए अब जमीन तंग हो चुकी है। अपनी अचूक रणनीतियों और खौफनाक कार्रवाई के लिए पहचानी जाने वाली उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बार फिर अपनी ताकत का लोहा मनवाया है। मेरठ में एसटीएफ ने एक सनसनीखेज कार्रवाई को अंजाम देते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अवैध तमंचों का जहर घोलने वाले एक शातिर और दुस्साहसी गिरोह के सदस्य को रंगे हाथों दबोच लिया है। एसटीएफ के इस आक्रामक एक्शन से अपराध जगत के सरगनाओं में हड़कंप मच गया है।
एसटीएफ के शिकंजे में आया मौत का सौदागर
एसटीएफ उत्तर प्रदेश लखनऊ की विभिन्न इकाइयों और टीमों को क्षेत्र में अवैध शस्त्र बनाने वाले और उनकी तस्करी करने वाले नेटवर्क का सफाया करने के कड़े निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम में श्री बृजेश कुमार सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक, एसटीएफ मेरठ के पर्यवेक्षण में गठित टीमों द्वारा लगातार अपराधियों की कुंडली खंगाली जा रही थी।
मुखबिर की सटीक सूचना पर एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने थाना लालकुर्ती क्षेत्र के अंतर्गत बीएसएनएल ऑफिस से मॉल रोड जाने वाले रास्ते पर कुड़ाघर के पास से अभियुक्त तजम्मुल (पुत्र नसीम, निवासी खैरनगर, डासैन वाली गली, थाना देहलीगेट, जनपद मेरठ) को धर दबोचा।
बरामदगी देख कांप उठेगी रूह
अपराधियों के खिलाफ एसटीएफ की यह रेड इतनी सटीक थी कि आरोपी संभल तक नहीं सका। इसके पास से बरामद सामान खौफ पैदा करने के लिए काफी है:
21 अवैध तमंचे (315 बोर) की बड़ी खेप
भारी मात्रा में शस्त्र बनाने के उपकरण, जिसमें 1 हथौड़ी, 11 आरी के पत्ते, 2 रेती, 23 वेल्डिंग रोल, 1 शिकंजा, और 1 वेल्डिंग मशीन शामिल है 1 मोबाइल फोन माफियाओं को सीधी चेतावनी: प्रदेश में अपराध का साम्राज्य नहीं टिकेगा
पूछताछ में इस शातिर अपराधी ने कबूला कि वह पिछले 5 वर्षों से अवैध शस्त्र बनाने और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनپदों में इन्हें धड़ल्ले से सप्लाई करने का घृणित खेल खेल रहा था। ये सौदागर इन अवैध तमंचों को मात्र 4,000 से 5,000 रुपये में बेचकर समाज में खून-खराबा फैला रहे थे।
इस अपराधी का काला इतिहास इसकी हरकतों की गवाही देता है—वर्ष 2022 में भी इसी एसटीएफ टीम ने इसे 37 तमंचों के साथ थाना चरथावल (मुजफ्फरनगर) से दबोचा था। जेल की सलाखों से बाहर आते ही यह शातिर फिर से अपने पुराने मुजरिम भाइयों के साथ मिलकर इसी अवैध धंधे में कूद पड़ा था। इसके खिलाफ पहले से ही गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं और अब थाना लालकुर्ती में नया मुकदमा दर्ज कर इसे कानून के शिकंजे में कस दिया गया है।
यूपी एसटीएफ के इन तेवरों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खाकी का खौफ अपराधियों की छाती पर लकीर बनकर रहेगा। जो गैंग्स या माफिया समाज की सुरक्षा को चुनौती देंगे, उनका हश्र ऐसा ही होगा—एसटीएफ का हंटर हर तस्कर और अपराधी पर पूरी कठोरता से बरसता रहेगा!

